- श्वेता रंजन
सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सबसे कड़े शब्दों में निंदनीय बताया और सभी शीर्ष हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोर्ट के आदेशों में पीड़िता या उसके परिवार की पहचान किसी भी रूप में सामने न आए।
- श्वेता रंजन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी महिला के साथ सहमति संबंध यानि कि लिव इन में रहता है तो यह कानूनन कोई अपराध नहीं है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की बेंच ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
- Kanoon Live
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी महिला के साथ सहमति संबंध यानि कि लिव इन में रहता है तो यह कानूनन कोई अपराध नहीं है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की बेंच ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
- महेश गुप्ता
दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण DSLSA ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की। इन पहलों का शुभारंभ जस्टिस सूर्यकांत, भारत के चीफ जस्टिस एवं नालसा NALSA के संरक्षक-प्रमुख, के मार्गदर्शन में किया गया।
- श्वेता रंजन
सुप्रीम कोर्ट ने 32 वर्षीय हरीश राणा को इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह एतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली के एम्स को निर्देश दिया कि हरीश राणा को तुरंत भर्ती किया जाए, और लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया के लिए जरूरी व्यवस्था की जाए।
- Kanoon Live
सुप्रीम कोर्ट ने 32 वर्षीय हरीश राणा को इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह एतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली के एम्स को निर्देश दिया कि हरीश राणा को तुरंत भर्ती किया जाए, और लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया के लिए जरूरी व्यवस्था की जाए।
- श्वेता रंजन
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन अधिनियम, 1937 के अंतर्गत मुस्लिम महिलाओं के विरुद्ध भेदभावपूर्ण उत्तराधिकार प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका लखनऊ की एडवोकेट पौलोमी पविनी शुक्ला द्वारा दायर की गई है।
- महेश गुप्ता
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से ठीक पहले सरकारों की ओर से 'फ्रीबीज' मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की आलोचना की है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि यह चलन कब तक जारी रहेगा, चुनाव आते ही योजनाएं क्यों घोषित होती हैं? कोर्ट में 'फ्रीबीज' पर रोक के लिए 2022 में दायर याचिका पर अभी तक अंतिम सुनवाई नहीं हुई है। हाल में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को उठाया गया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इसपर मार्च में सुनवाई करेगा।
- श्वेता रंजन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी से पहले लड़का और लड़की बिल्कुल अजनबी होते हैं, इसलिए शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप बनाने में उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। शादी करने का झूठा वायदा करके शारीरिक संबंध बनाने की वजह से रेप की शिकायतों में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है। इस समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले शारीरिक संबंध के बारे में नौजवानों को सावधान किया
- Kanoon Live
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी से पहले लड़का और लड़की बिल्कुल अजनबी होते हैं, इसलिए शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप बनाने में उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।'
शादी करने का झूठा वायदा करके शारीरिक संबंध बनाने की वजह से रेप की शिकायतों में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है। इस समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले शारीरिक संबंध के बारे में नौजवानों को सावधान किया।
शादी के झूठे वादे पर रेप के केस का सामना कर रहे एक शख्स की बेल पिटीशन पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्जल भुइयां ने सवाल उठाए कि जिस महिला की बात हो रही है, वह आरोपी युवक के साथ दुबई जाने के लिए कैसे मान गई, जहां दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सहमति से होता है। हम पुराने जमाने के हो सकते हैं, लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की, आपस में बिल्कुल अजनबी होते हैं। उन्हें शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप बनाने में सावधानी बरतनी चाहिए।'
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उनके रिश्ते में चाहे जो भी अच्छा-बुरा हो, हम यह नहीं समझ पाते कि वे शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप कैसे बना सकते हैं... आपको बहुत सावधान रहना चाहिए; शादी से पहले किसी पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए।
इस मामले में शिकायतकर्ता लड़की ने कहा था कि वह आरोपी युवक के कहने पर दुबई गई थी, जिसने शादी का झांसा देकर उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाए, और बाद में किसी और से शादी कर ली।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इस तरह के मामले ट्रायल और सजा के लिए सही नहीं हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों से सेटलमेंट की संभावना तलाशने को कहा और उनके विचार जानने के लिए मामले की सुनवाई बुधवार तक टाल दी।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता लड़की इस बारे में इतनी सख्त थी तो उसे शादी से पहले नहीं जाना चाहिए था। ये ऐसे मामले नहीं हैं जिनमें कोर्ट में ट्रायल किया जाए और सजा दी जाए , जबकि सहमति से रिश्ता हो।







