सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन RTI पोर्टल की शुरुआत कर दी है। अब सूचना अधिकार कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से जानकारी पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने देश के 50वें चीफ़ जस्टिस के तौर पर पदभार ग्रहण किया। बुधवार सुबह राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस चंद्रचूड़ को देश के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ग्रहण कराई। शपथ ग्रहण के बाद सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि देश की सेवा करना मेरी प्राथमिकता है। हम भारत के सभी नागरिकों के हितों की रक्षा करेंगे, चाहे वह तकनीक हो, रजिस्ट्री सुधार हो या न्यायिक सुधारों के मामले में हों।

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला पर तेजाब फेंकने के मामले में दो युवकों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का फ़ैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पीड़ित महिला को मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपये दिये जाने का आदेश भी दिया है।

 

कर्नाटक में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर लगी रोक के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच सुनवाई करेगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेंच में शामिल दोनों जजों की राय अलग अलग है। जहां जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन को सही ठहराया है, तो वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के बैन जारी रखने के आदेश को रद कर दिया। ऐसे में विरोधाभासी फ़ैसला आने से अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी बेंच में भेजा गया है, इस मामले को तीन जजों की बेंच देखेगी। जब तक तीन जजों की बेंच का फैसला नहीं आ जाता, तब तक कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश जारी रहेगा, यानि हिजाब पर प्रतिबंध लागू रहेगा।

कर्नाटक में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर लगी रोक के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच सुनवाई करेगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेंच में शामिल दोनों जजों की राय अलग अलग है। जहां जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन को सही ठहराया है, तो वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के बैन जारी रखने के आदेश को रद कर दिया। ऐसे में विरोधाभासी फ़ैसला आने से अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी बेंच में भेजा गया है, इस मामले को तीन जजों की बेंच देखेगी। जब तक तीन जजों की बेंच का फैसला नहीं आ जाता, तब तक कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश जारी रहेगा, यानि हिजाब पर प्रतिबंध लागू रहेगा।

बता दें कि कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी के शुरुआत में उडुपी के ही एक सरकारी कालेज से शुरू हुआ था, जहां मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर आने से रोका गया था। स्कूल प्रबंधन ने इसे ड्रेस कोड के खिलाफ बताया था। इसके बाद अन्य शहरों में भी यह विवाद फैल गया। मुस्लिम लड़कियां इसका विरोध कर रही हैं, जिसके खिलाफ हिंदू संगठनों से जुड़े युवकों ने भी भगवा शॉल पहनकर जवाबी विरोध शुरू कर दिया था। एक कॉलेज में यह विरोध हिंसक झड़प में बदल गया था, जहां पुलिस को स्थिति नियंत्रण करने के लिए आंसू गैस छोड़नी पड़ी थी।

दो जजों की बैंच में अलग-अलग फ़ैसला सुनाने वाले जजों में जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होंने हिजाब पहनना या न पहनना, ये पसंद का मामला है। लड़कियों की शिक्षा बहुत जरूरी है। जस्टिस धूलिया ने कहा कि धार्मिक प्रधाओं का मुद्दा विवाद के समाधान के लिए जरूरी नहीं था, वहां हाईकोर्ट ने गलत रास्ता अपनाया। ये अनुच्छेद 15 के बारे में था, ये पसंद की बात थी, इससे ज्यादा और कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि उनके दिमाग में सबसे अहम सवाल लड़कियों की शिक्षा थी और कहा कि क्या हम उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं?
इसके दूसरी तरफ़ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर सभी 26 याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि मेरी राय अलग है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने आदेश में 11 सवाल तैयार किए हैं। पहला तो यही है कि क्या इस अपील को संविधान बेंच के पास भेजा जाना चाहिए?

इस मामले में सुनवाई के दौरान 21 वकीलों के बीच दस दिनों तक बहस चली थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं में से एक में बताया गया है कि सरकार और प्रशासन छात्राओं को अपने धर्मों का पालन करने देने में भेदभाव बरतते हैं। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने की परिस्थितियां पैदा होती हैं। एक अन्य याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में छात्र-छात्राओं को समानता के आधार पर क समान निर्धारित वेशभूषा पहननी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई में सबसे पहले कर्नाटक सरकार के उस सर्कुलर पर बहस छिड़ी जिसमें हिजाब पर बैन लगाने की बात हुई थी। अब याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में जोर देकर कहा कि राज्य सरकार ने क्या सोचकर आजादी के 75 साल बाद यूं हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की सोची? ऐसे में किस आधार पर राज्य सरकार वो सर्कुलर लेकर आई थी, ये स्पष्ट नहीं हो पाया। दुनिया के दूसरे देशों के कुछ उदाहरण देकर भी हिजाब पहनने को सही ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट के सामने अमेरिकी सेना के कुछ नियम बताए गए थे तो पश्चिम के दूसरे देशों में दिए गए अधिकारों का भी जिक्र हुआ था। कोर्ट को बताया गया कि अमेरिका में सेना में भर्ती लोगों को पगड़ी पहनने की इजाजत रहती है।

ग़ौरतलब है कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने 14 मार्च को हिजाब विवाद पर फैसला सुनाया था, जिसमें कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। हाईकोर्ट ने आगे कहा था कि छात्र स्कूल या कॉलेज की निर्धारिक ड्रेस कोड पहनने से इनकार नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा पटाखों पर लगाई गई रोक को हटाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए इस संबंध में अगली सुनवाई में अंतिम आदेश पारित किया जाएगा। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दिल्ली में पटाखों पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। ग़ौरतलब है कि दिल्ली की 'आप' सरकार ने 1 जनवरी 2023 तक सभी तरह के पटाखों की बिक्री, उत्पादन और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

 

कोरोनाकाल में लोकप्रिय हुई दवाई Dolo की बिक्री बढ़ाने के लिए दवा कंपनी की ओर से डॉक्टरों को 1000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के गिफ्ट बांटे गए ताकि वो इलाज के लिए मरीजों के पर्चे पर इसी दवा का ही नाम लिखें।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पति के देहांत के बाद दोबारा शादी करने वाली महिला अपने स्वर्गीय पति के बच्चे का उपनाम तय कर सकती है और बच्चे को अपनी दूसरी शादी वाले नए परिवार में शामिल कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार कर दिया।

 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को सुनने के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसपर सोमवार 11 जुलाई को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की अवकाशकालीन बेंच ने कहा कि याचिका को सोमवार को उपयुक्त बेंच के समक्ष लिस्ट किया जाएगा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के  खिलाफ आरोप लगाना एक नया फैशन बन रहा है। जज जितना मजबूत होता है, उसके खिलाफ उतने ही बड़े आरोप लगाए जाते हैं। यह मुंबई में हो रहा है, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रहा है और अब चेन्नई में भी। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ एक वकील द्वारा दायर अपील पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें वकील को अदालत की अवमानना के लिए दोषी ठहराया गया था।

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