दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित उद्घाटन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में छह दशकों से इस संस्थान का मार्गदर्शन करने वाले संवैधानिक आदर्शों, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और विधि के शासन के प्रति अटूट विश्वास को दोहराया गया। उद्घाटन समारोह 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के एस-ब्लॉक परिसर में आयोजित किया गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीशों, सुप्रीम कोर्ट एवं दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों, बार के सदस्यों, न्यायिक अधिकारियों तथा विधि जगत की अन्य विशिष्ट हस्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस आयोजन का उद्देश्य दिल्ली हाईकोर्ट की गौरवशाली विरासत और न्यायिक संस्थान के रूप में उसके महत्वपूर्ण योगदान का सम्मान करना था।

उद्घाटन समारोह में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत; सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति मनमोहन, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय; दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांबरे; दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिनेश मेहता तथा दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन. हरिहरन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

दिल्ली हाईकोर्ट के 60 वर्ष केवल छह दशकों की संस्थागत यात्रा नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रतिबद्धता, न्यायिक विवेक और विधि के शासन के प्रति अटूट निष्ठा के प्रतीक हैं। अपने ऐतिहासिक फैसलों और संस्थागत प्रयासों के माध्यम से न्यायालय ने संवैधानिक लोकतंत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी भूमिका निभाई है। इनमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, आजीविका, मानवीय गरिमा, समानता, सुशासन, जवाबदेही तथा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांबरे के स्वागत भाषण से हुई। इसके पश्चात सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विशेष संबोधन दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने समारोह में अध्यक्षीय संबोधन प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने एक संवैधानिक संस्थान के रूप में न्यायपालिका की स्थायी जिम्मेदारियों और मूल आदर्शों पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

इन संबोधनों के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट की छह दशकों की संस्थागत यात्रा, न्याय प्रशासन में उसके योगदान तथा भविष्य में न्यायालय के कार्यों का मार्गदर्शन करने वाले संवैधानिक सिद्धांतों पर विचार-विमर्श का अवसर मिला।

समारोह का समापन दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिनेश मेहता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने उद्घाटन कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।

दिल्ली हाईकोर्ट की छह दशकों की न्यायिक सेवा का यह महत्वपूर्ण पड़ाव केवल संस्थान के गौरवशाली इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, न्यायिक स्वतंत्रता, न्याय तक समान पहुंच और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ करने का भी अवसर है।

यह ऐतिहासिक वर्षगांठ उन पीढ़ियों के न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय के कर्मचारियों के योगदान का सम्मान करती है, जिन्होंने इस संस्थान की गौरवशाली विरासत को आकार दिया है। साथ ही, यह संकल्प भी दोहराती है कि न्याय, निष्पक्षता और विधि का शासन आने वाली पीढ़ियों तक इस संस्थान का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने 60वीं वर्षगांठ समारोह का किया शुभारंभ

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