चुनाव से पहले मुफ्त की घोषणाओं “फ्रीबीज” पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- महेश गुप्ता
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से ठीक पहले सरकारों की ओर से 'फ्रीबीज' मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की आलोचना की है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि यह चलन कब तक जारी रहेगा, चुनाव आते ही योजनाएं क्यों घोषित होती हैं? कोर्ट में 'फ्रीबीज' पर रोक के लिए 2022 में दायर याचिका पर अभी तक अंतिम सुनवाई नहीं हुई है। हाल में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को उठाया गया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इसपर मार्च में सुनवाई करेगा।
इस मामले में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में सुब्रह्मण्यम बालाजी बनाम तामिलनाडु राज्य मामले में जो फैसला दिया था, उस पर अब दोबारा विचार करने की जरूरत है। तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि राजनीतिक पार्टियां चुनावी घोषणा पत्र में जो वादे करती है, वह करप्ट प्रैक्टिस नहीं है, गत 19 फरवरी को चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि किसी राज्य का राजस्व सरप्लस भी है, तो क्या यह उसका दायित्व नहीं है कि वह धनराशि सड़कों, अस्पतालों और स्कूलों के विकास पर खर्च की जाए, कोर्ट ने कहा कि सभी राजनीतिक दल और नेता इस मुद्दे पर पुनर्विचार करें।
गौरतलब है कि फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जनता अब काम करने के इच्छुक नहीं है, क्योंकि उन्हें मुफ्त राशन और धनराशि मिल रही है। इसके अलावा अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह सोच रहा है कि इसके लिए एक एक्सपर्ट बॉडी बनाई जाए, जो अपना सुझाव दे सके। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि कोई भी राजनीतिक दल इस बारे में बात नहीं करती है, क्योंकि सभी दल वोटरों को मुफ्त उपहार, यानि कि फ्रीबीज देना चाहते हैं।
इसी क्रम में अगस्त 2022 में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा था कि कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि यह गंभीर विषय नहीं है।क्योंकि जो लोग मुफ्त उपहार बांटने के खिलाफ है, उनका यह अधिकार है, क्योंकि वह सरकार को टैक्स देते हैं, इसलिए इस विषय पर बहस जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में पार्टी ने उस समय राज्य की महिला मतदाताओं को 10 हजार रुपये ट्रांसफर करने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा था कि आचार संहिता लागू रहते कैश ट्रांसफर किया गया, जो कि गलत है, 17 अगस्त 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुफ्त उपहार का मामला जटिल होता जा रहा है। क्या मुफ्त शिक्षा और मुफ्त पानी मुफ्त उपहार की श्रेणी में है? तत्कालीन चीफ जस्टिस ने कहा था कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, उनसे कुछ अहम सवाल उठते हैं कि मुफ्त उपहार क्या है, और क्या नहीं है?

